Gandhamādana-praveśa and Vṛṣaparvan-āśrama
Entry toward Gandhamādana; hospitality and onward route
ते तं तदा तोमरपट्टिशाद्यि- व्यविद्धशस्त्रै: सहसा निपेतु: । जिघांसव: क्रोधवशा: सुभीमा भीम॑ समन्तात् परिवद्रुरुग्रा:,यह देख वे भयंकर क्रोधवश नामक राक्षस भीमसेनको मार डालनेकी इच्छासे शत्रुओंके शस्त्रोंको नष्ट कर देनेवाले तोमर, पट्टिश आदि आयुधोंको लेकर सहसा उनकी ओर दौड़े और उन्हें चारों ओरसे घेरकर खड़े हो गये। वे सब-के-सब बड़े उग्र स्वभावके थे। इधर भीमसेन कुन्तीदेवीके गर्भसे वायु देवताके द्वारा उत्पन्न होनेके कारण बड़े बलवान, शूरवीर, वेगशाली एवं शत्रुओंका वध करनेमें समर्थ थे। वे सदा ही सत्य एवं धर्ममें रत थे। पराक्रमी तो वे ऐसे थे कि अनेक शत्रु मिलकर भी उन्हें परास्त नहीं कर सकते थे
te taṃ tadā tomarapaṭṭiśādyair vyaviddhaśastraiḥ sahasā nipetuḥ | jighāṃsavaḥ krodhavaśāḥ subhīmā bhīmaṃ samantāt parivadrur ugrāḥ ||
ഇത് കണ്ട അതിഭയങ്കരരും ക്രോധവശരുമായ രാക്ഷസന്മാർ ഭീമനെ കൊല്ലണമെന്ന ഉദ്ദേശത്തോടെ തോമരം, പട്ടിശം മുതലായ കുത്തിത്തുളയ്ക്കുന്ന ആയുധങ്ങൾ എടുത്ത് പെട്ടെന്ന് അവന്റെ മേൽ പാഞ്ഞുവന്നു; ചുറ്റുമെല്ലാം വളഞ്ഞുനിന്നു. അവർ എല്ലാവരും ഉഗ്രസ്വഭാവക്കാരായിരുന്നു.
वैशम्पायन उवाच