ब्राह्मणस्य पूर्वतरा वृत्तिः — The Earlier Ideal Conduct of a Brahmana
River-of-Saṃsāra Metaphor
तानिदानीं न पश्यामि यैर्भुक्तेयं पुरा मही । जिन लोगोंने पहले वृक्ष, ओषधि, रत्न, जीव-जन्तु, वन और खानोंसहित इस सारी पृथ्वीका उपभोग किया है, उन सबको मैं इस समय नहीं देखता हूँ ।। पृथुरैलो मयो भीमो नरक: शम्बरस्तथा,कालेनाभ्याहता: सर्वे कालो हि बलवत्तर: | पृथु, इलानन्दन पुरूरवा, मय, भीम, नरकासुर, शम्बरासुर, अश्वग्रीव, पुलोमा, स्वर्भानु, अमितध्वज, प्रह्नाद, नमुचि, दक्ष, विप्रचित्ति, विरोचन, हीनिषेव, सुहोत्र, भूरिहा, पुष्पवान्, वृष, सत्येषु, ऋषभ, बाहु, कपिलाश्वच, विरूपक, बाण, कार्तस्वर, वह्ि, विश्वर्ंष्ट, नैर्ऋति, संकोच, वरीताक्ष, वराहाश्व, रुचिप्रभ, विश्वजित्, प्रतिरूप, वृषाण्ड, विष्कर, मधु, हिरण्यकशिपु और कैटभ--ये तथा और भी बहुत-से दैत्य, दानव एवं राक्षस सभी इस पृथ्वीके स्वामी हो चुके हैं। पहलेके और बहुत पहलेके ये पूर्वोक्त तथा अन्य अनेक दैत्यराज, दानवराज एवं दूसरे-दूसरे नरेश जिनका नाम हमलोग सुनते आ रहे हैं, कालसे पीड़ित हो सभी इस पृथ्वीको छोड़कर चले गये; क्योंकि काल ही सबसे बड़ा बलवान् हैं
bhīṣma uvāca | tān idānīṃ na paśyāmi yair bhukteyaṃ purā mahī | pṛthur ailomayo bhīmo narakaḥ śambaras tathā | kālenābhyāhatāḥ sarve kālo hi balavattaraḥ |
ഭീഷ്മൻ പറഞ്ഞു—മുമ്പ് ഈ ഭൂമിയെ അനുഭവിച്ചു ഭരിച്ചവരെ ഞാൻ ഇപ്പോൾ കാണുന്നില്ല. പൃഥു, ഇളയുടെ പുത്രൻ പുരൂരവസ്, മയ, ഭീമ, നരക, ശംബര—ഇവരെല്ലാം കാലത്തിന്റെ പ്രഹരത്തിൽ വീണു; കാരണം കാലം തന്നെയാണ് കൂടുതൽ ശക്തൻ.
भीष्म उवाच