भीमसेनस्य बहुमहारथसंयुगः
Bhīmasena’s Engagement with Multiple Mahārathas
(भीष्मो5तीव सुसंक्रुद्ध: पृषत्कैरर्जुनं बलात् । जघान समरे मुर्ध्नि सिंहवद् विनदन् मुहुः ।।) तत्पश्चात् भीष्मने भी रणक्षेत्रमें अत्यन्त क्ुद्ध होकर अपने बाणोंद्वारा बलपूर्वक अर्जुनके मस्तकपर आघात किया। उसके बाद वे बारंबार सिंहके समान गर्जना करने लगे। वासुदेवस्तु सम्प्रेक्ष्य पार्थस्य मृदुयुद्धताम् भीष्मं च शरवर्षाणि सृजन्तमनिशं युधि,युगान्तमिव कुर्वाणं भीष्म यौधिष्छिरे बले । भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि अर्जुन मन लगाकर युद्ध नहीं कर रहे हैं। वे भीष्मके प्रति कोमलता दिखा रहे हैं और उधर भीष्म युद्धमें सेनाके मध्यभागमें खड़े हो निरन्तर बाणोंकी वर्षा करते हुए दोपहरके सूर्यके समान तप रहे हैं। पाण्डवसेनाके चुने हुए उत्तमोत्तम वीरोंको मार रहे हैं और युधिष्ठिरसेनामें प्रलयकालका-सा दृश्य उपस्थित कर रहे हैं
sañjaya uvāca | bhīṣmo 'tīva susaṃkruddhaḥ pṛṣatkair arjunaṃ balāt jaghāna samare mūrdhni siṃhavad vinadan muhuḥ ||
തുടർന്ന് ഭീഷ്മൻ അത്യന്തം ക്രോധത്തോടെ യുദ്ധത്തിൽ തന്റെ അമ്പുകളാൽ ബലമായി അർജുനന്റെ തലയിൽ പ്രഹരിച്ചു; പിന്നെ അവൻ വീണ്ടും വീണ്ടും സിംഹത്തെപ്പോലെ ഗർജിച്ചു।
संजय उवाच