सूर्य–कर्णोपदेशः
Sūrya’s Counsel to Karṇa on Kīrti and the Kuṇḍala
विस्तीर्ण चैव नः सैन्यं हन्याच्छिद्रेण वै पर: । प्लवोडुपप्रतारश्न नैवात्र मम रोचते,“इसके सिवा नौका आदिसे यात्रा करनेपर हमारी सेना छिट-फुट होकर बहुत दूरतक फैल जायगी। उस दशामें अवसर पाकर शत्रु इसका नाश भी कर सकता है। इसीलिये डोंगी और नाव आदिपर बैठकर पार उतरनेकी बात मुझे ठीक नहीं जँचती है
vistīrṇaṃ caiva naḥ sainyaṃ hanyāc chidreṇa vai paraḥ | plavōḍupa-pratāraś ca naivātra mama rōcate ||
«ຍິ່ງໄປກວ່ານັ້ນ ຖ້າຂ້າມດ້ວຍເຮືອນ້ອຍໆ ແລະກະດານລອຍ ກອງທັບຂອງເຮົາຈະແຕກກະຈາຍ ແລະຍາວອອກໄປໄກ. ເມື່ອນັ້ນ ສັດຕູຈະພົບຊ່ອງວ່າງ ແລະອາດໂຈມຕີທຳລາຍໄດ້. ດັ່ງນັ້ນ ແຜນການຂ້າມໂດຍນັ່ງເຮືອ ແລະກະດານລອຍ ບໍ່ເຂົ້າກັບໃຈຂ້ອຍ».
मार्कण्डेय उवाच