सूर्य–कर्णोपदेशः
Sūrya’s Counsel to Karṇa on Kīrti and the Kuṇḍala
उपाय: को नु भवतां मतः सागरलड्घने । इयं हि महती सेना सागरश्नातिदुस्तर:,“मित्रो! हमारी यह सेना बहुत बड़ी है और सामने अत्यन्त दुस्तर महासागर लहरें ले रहा है। ऐशी दशामें आपलोग समुद्रके पार जानेके लिये कौन-सा उपाय ठीक समझते हैं?
upāyaḥ ko nu bhavatāṃ mataḥ sāgara-laṅghane | iyaṃ hi mahatī senā sāgaraś cātidustaraḥ ||
ມາຣະກັນເດຍ ກ່າວວ່າ: «ຕາມຄວາມເຫັນຂອງພວກເຈົ້າ ຄວນໃຊ້ວິທີໃດເພື່ອຂ້າມທະເລ? ເພາະກອງທັບນີ້ໃຫຍ່ຫຼາຍ ແລະທະເລທີ່ຢູ່ຕໍ່ໜ້ານັ້ນຂ້າມໄດ້ຍາກຢ່າງຍິ່ງ».
मार्कण्डेय उवाच