सूर्य–कर्णोपदेशः
Sūrya’s Counsel to Karṇa on Kīrti and the Kuṇḍala
गिरिकूटनिभाड़ानां सिंहानामिव गर्जताम् | श्रूयते तुमुल: शब्दस्तत्र तत्र प्रधावताम्,उनके अंग पर्वतोंके शिखरके सदृश जान पड़ते थे। वे सबके सब सिंहोंके समान गरजते और इधर-उधर दौड़ते थे। उन सबका सम्मिलित शब्द बड़ा भयंकर प्रतीत होता था
girikūṭanibhāḍānāṃ siṃhānām iva garjatām | śrūyate tumulaḥ śabdas tatra tatra pradhāvatām ||
ມາຣະກັນເດຍ ກ່າວວ່າ: «ອະວະຍະວະຂອງພວກເຂົາເບິ່ງຄືຍອດພູ. ເມື່ອພວກເຂົາຮ້ອງຄໍາຮາມດັ່ງສິງ ແລະພຸ້ນໄປມາທົ່ວທິດ ກໍໄດ້ຍິນສຽງອື້ອອຶງອັນຮຸນແຮງຢູ່ທີ່ນັ້ນໆ—ເປັນສຽງຮ່ວມກັນອັນນ່າຢ້ານ ເກີດຈາກການເຄື່ອນໄຫວຂອງພວກເຂົາທັງຫມົດ».
मार्कण्डेय उवाच