अग्राह्य-ज्ञातिसंबन्धमण्डल-विवेचनम् / Managing Unreadable Kinship Networks: Vāsudeva–Nārada on Cohesion
तच्च सिध्येत् प्रयत्नेन कृत्वा कर्म सुदुष्करम् । महाक्षयं व्ययो वा स्याद् विनाशो वा पुनर्भवेत्,बड़े प्रयत्नसे अत्यन्त दुष्कर कर्म महान् संहाररूप युद्ध करनेपर राज्यको वापस लेनेका कार्य सिद्ध हो सकता है, परंतु इसमें धनका बहुत व्यय और असंख्य मनुष्योंका पुन: विनाश होगा
tac ca sidhyet prayatnena kṛtvā karma suduṣkaram | mahākṣayaṃ vyayo vā syād vināśo vā punar bhavet |
ນາຣະດະ ກ່າວວ່າ: «ເປົ້າໝາຍນັ້ນຍ່ອມສຳເລັດໄດ້ດ້ວຍຄວາມພາກພຽນຢ່າງແຮງກ້າ ໂດຍການກະທຳວຽກທີ່ຍາກຢ່າງຫາທຽບບໍ່ໄດ້. ແຕ່ມັນຈະນຳມາຊຶ່ງການທຳລາຍອັນໃຫຍ່ ແລະຄ່າໃຊ້ຈ່າຍຫນັກໜ່ວງ; ແລະອີກຄັ້ງຈະເກີດວິນາດ—ການສູນເສຍຊີວິດນັບບໍ່ຖ້ວນອີກ».
नारद उवाच