कामबन्धन-निवृत्ति तथा शान्तिलक्षण-उपदेशः | Release from Desire-Bondage and the Marks of Peace
अपन का छा | अत-४#-#कत त्रिचत्वारिशर्दाधिकद्विशततमो< ध्याय: ब्राह्मणोंके उपलक्षणसे गार्हस्थ्य-धर्मका वर्णन व्यास उवाच द्वितीयमायुषो भागं गृहमेधी गृहे वसेत् । धर्मलब्धैर्युतो दारैरग्नीनाहृत्य सुब्रत:,व्यासजी कहते हैं--बेटा! गृहस्थ पुरुष अपनी आयुके दूसरे भागतक गृहस्थधर्मका पालन करते हुए घरपर ही रहे। धर्मानुसार स्त्रीसे विवाह करके उसके साथ अग्नि-स्थापना करनेके पश्चात् नित्य अग्निहोत्र आदि करे और उत्तम व्रतका पालन करता रहे
vyāsa uvāca | dvitīyam āyuṣo bhāgaṃ gṛhamedhī gṛhe vaset | dharmalabdhair yuto dārair agnīn āhṛtya subrataḥ ||
ວະຍາສະກ່າວວ່າ: “ລູກເອີຍ, ໃນຂັ້ນທີສອງຂອງຊີວິດ ຜູ້ເປັນຄົນຄອບຄົວພຶງຢູ່ໃນເຮືອນ ດຳລົງທຳມະແຫ່ງຄົນຄອບຄົວ. ໄດ້ພັນລະຍາດ້ວຍວິທີອັນຊອບທຳ ແລ້ວຕັ້ງໄຟສັກສິດ ຈຶ່ງພຶງປະກອບອັກນິໂຫຕຣະ ແລະພິທີປະຈຳວັນອື່ນໆ ຢ່າງສະໝໍາເສມ ດ້ວຍຄວາມໝັ້ນຄົງໃນວຣະຕະອັນດີ.”
व्यास उवाच