अर्जुनस्य युधिष्ठिरं प्रति क्षात्रधर्मोपदेशः | Arjuna’s Counsel to Yudhiṣṭhira on Kṣatra-Dharma
मा त्वमेवं गते किंचिच्छोचेथा: क्षत्रियर्षभ । गतास्ते क्षत्रधर्मेण शस्त्रपूता: परां गतिम्,'क्षत्रियशिरोमणे! ऐसी अवस्थामें आप तनिक भी शोक न कीजिये। युद्धमें मारे गये वे सभी वीर क्षत्रियधर्मके अनुसार शस्त्रोंसे पवित्र होकर परम गतिको प्राप्त हो गये हैं
ໂອ ຜູ້ເປັນຍອດແຫ່ງກະສັດນັກຮົບ! ໃນສະພາບເຊັ່ນນີ້ ທ່ານຢ່າໄດ້ໂສກເສົ້າແມ່ນແຕ່ນ້ອຍ. ວີລະຊົນກະສັດນັກຮົບທີ່ຕາຍໃນສົງຄາມນັ້ນ ໄດ້ປະພຶດຕາມທຳຂອງກະສັດນັກຮົບ ແລະຖືກຊຳລະໃຫ້ບໍລິສຸດດ້ວຍອາວຸດ ຈຶ່ງໄດ້ເຖິງຄະຕິອັນສູງສຸດ.
वैशम्पायन उवाच