आपद्धर्मनिर्णयः — विश्वामित्र-श्वपचसंवादः
Apaddharma Determination: Dialogue of Viśvāmitra and the Śvapaca
न्यस्तमानो5स्मि भक्तो5स्मि शिष्यस्त्वद्धितकृत् तथा । निदेशवशवर्ती च भवन्तं शरणं गत:,“इस समय मेरा मान भंग हो चुका है। मैं तुम्हारा भक्त और शिष्य हो गया हूँ। तुम्हारे हितका साधन करूँगा और सदा तुम्हारी आज्ञाके अधीन रहूँगा। मैं सब प्रकारसे तुम्हारी शरणमें आ गया हूँ
ພີດສະມະກ່າວວ່າ: «ບັດນີ້ເກຍດສັກຂອງຂ້າພະເຈົ້າຖືກວາງລົງແລ້ວ. ຂ້າພະເຈົ້າເປັນຜູ້ຈົ່ງຮັກພັກດີ ແລະເປັນສິດຂອງທ່ານ. ຂ້າພະເຈົ້າຈະກະທຳເພື່ອປະໂຫຍດຂອງທ່ານ ແລະຈະຢູ່ໃຕ້ຄຳສັ່ງຂອງທ່ານເສມອ. ຂ້າພະເຈົ້າໄດ້ເຂົ້າມາພຶ່ງພາທ່ານເປັນທີ່ພັກພິງໂດຍທຸກປະການ».
भीष्म उवाच