धृतराष्ट्रविलापः — Dhṛtarāṣṭra’s Lament and Inquiry (Śalya-parva, Adhyāya 2)
निहता: समरे सर्वे किमन्यद् भागधेयत: । सूत संजय! जहाँ समरभूमिमें नाना देशोंसे आये हुए देवराज इन्द्रके समान पराक्रमी बहुत-से शूरवीर महाथनुर्धर, अस्त्रवेत्ता एवं युद्धदुर्मद क्षत्रिय सारे-के-सारे मार डाले गये, वहाँ भाग्यके अतिरिक्त दूसरा क्या कारण हो सकता है?
ພວກເຂົາທັງໝົດຖືກສັງຫານໃນສະໜາມຮົບ—ຈະມີເຫດອື່ນໃດນອກຈາກພາກຍະ (ຊະຕາກຳ) ໄດ້ອີກ? ໂອ ສູຕ ສັນຈະຍ! ໃນດິນແດນສົງຄາມນັ້ນ ມີວີລະບຸລຸດຫຼາຍຄົນມາຈາກຫຼາຍປະເທດ ກ້າຫານດັ່ງພຣະອິນທຣາ ເປັນຜູ້ຖືຄັນທະນູໃຫຍ່ ຮູ້ອາວຸດ ແລະຫມັ້ນໃນສົງຄາມ—ຖືກສັງຫານໝົດສິ້ນ; ດັ່ງນັ້ນ ນອກຈາກຊະຕາກຳ ຈະມີເຫດອື່ນໃດອີກ?
धघतयाट्र उवाच