शिरोभूषण, केयूर, सुन्दर अंगद, गलेके हार, पदक, सोनेकी जंजीर, उत्तम मणि, हीरे, सुवर्ण तथा मुक्ता आदि छोटे-बड़े मांगलिक रत्न, अत्यन्त सुख भोगनेके योग्य शरीर, चन्द्रमाको भी लज्जित करनेवाले मुखसे युक्त मस्तक, देह, भोग, आच्छादन-वस्त्र तथा मनोरम सुख--इन सबको त्यागकर स्वधर्मकी पराकाष्ठाका पालन करते हुए सम्पूर्ण लोकोंमें अपने यशका विस्तार करके वे वीर सैनिक दिव्य लोकोंमें पहुँच गये हैं | २०-- २२ |। निवर्त दुर्योधन यान्तु सैनिका व्रजस्व राजन् शिबिराय मानद । दिवाकरो<प्येष विलम्बते प्रभो पुनस्त्वमेवात्र नरेन्द्र कारणम्,दूसरोंको सम्मान देनेवाले राजा दुर्योधन! अब लौटो। इन सैनिकोंको भी जाने दो। शिबिरमें चलो। प्रभो! ये भगवान् सूर्य भी अस्ताचलपर लटक रहे हैं। नरेन्द्र! तुम्हीं इस नर- संहारके प्रधान कारण हो
śalya uvāca | nivarta duryodhana yāntu sainikā vrajasva rājan śibirāya mānada | divākaro 'py eṣa vilambate prabho punas tvam evātra narendra kāraṇam ||
ຊາລະຍະ ກ່າວວ່າ: «ເຄື່ອງປະດັບສີສະ, ກຳໄລ, ອັງກະດະອັນງາມ, ສາຍຄໍ, ປະດັບອົງ, ສາຍໂສ້ຄຳ, ແກ້ວມະນີຊັ້ນດີ, ເພັດ, ຄຳ, ແລະມຸກ—ຮັດຕະນະມົງຄຸນນ້ອຍໃຫຍ່ທັງປວງ; ກາຍທີ່ຄວນແກ່ການເສບສຸກອັນສູງສຸດ; ຫົວທີ່ມີໃບໜ້າງາມຈົນດວງຈັນຍັງອາຍ—ທັງກາຍ, ຄວາມເພີດເພີນ, ເຄື່ອງນຸ່ງຫົ່ມ, ແລະຄວາມສຸກອັນລະເອີຍ—ເຂົາເຈົ້າລະທິ້ງທັງໝົດນີ້ ແລະປະພຶດສະວະທຳຂອງຕົນເຖິງຂີດສຸດ; ຂະຫຍາຍຊື່ສຽງໄປທົ່ວໂລກ ແລະວິລະຊົນນັກຮົບເຫຼົ່ານັ້ນໄດ້ເຖິງໂລກທິບ. «ຈົ່ງຖອນກັບ, ດຸຣະໂຢທະນະ; ໃຫ້ທະຫານເຫຼົ່ານີ້ກັບໄປດ້ວຍ. ໄປສູ່ຄ່າຍເຖິງ, ໂອ ກະສັດຜູ້ໃຫ້ກຽດແກ່ຜູ້ອື່ນ. ແມ່ນແຕ່ດວງອາທິດກໍຍັງຊ້າຢູ່ ກຳລັງຈະຕົກສູ່ຂອບຟ້າທາງຕາເວັນຕົກ. ໂອ ຈອມເຈົ້າ, ຜູ້ເປັນຈອມມະນຸດ—ອີກຄັ້ງໜຶ່ງ ເຈົ້າເອງແມ່ນເຫດຫຼັກຂອງການຂ້າຟັນມະນຸດນີ້»។
शल्य उवाच