घटोत्कच-कर्णयुद्धम्
Ghaṭotkaca–Karna Combat and the Release of Śakti
न तेषां मतिपूर्व हि सुकृतं दृश्यते क्वचित् । दुष्कृतं तव वा वीर बुद्धया हीनं॑ कुरूद्धह,वीर कुरुश्रेष्ठ! मुझे तो पाण्डवोंका बुद्धिपूर्वक किया हुआ कहीं कोई सुकृत नहीं दिखायी देता अथवा तुम्हारा बुद्धिहीनतापूर्वक किया हुआ कोई दुष्कृत भी देखनेमें नहीं आता
ກັນນະໄດ້ກ່າວວ່າ: «ໂອ ວິລະຊົນ ຜູ້ປະເສີດໃນວົງກຸຣຸ! ຂ້າພະເຈົ້າບໍ່ເຄີຍເຫັນການກະທຳດີອັນເຮັດດ້ວຍຈິດຕັ້ງໃຈແລະປັນຍາຂອງພານດະວະເລີຍ; ແລະກໍບໍ່ເຫັນການກະທຳຊົ່ວອັນເຮັດດ້ວຍຄວາມຂາດປັນຍາຂອງເຈົ້າເຊັ່ນກັນ»។
कर्ण उवाच