Droṇa Encircled at Night: Coalition Advance and Battlefield Omens (द्रोणपर्यावरणं रात्रियुद्धवर्णनम्)
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ श्लोक मिलाकर कुल ५२ श्लोक हैं।) अपन बक। ] अति्ऑशाए:< सप्तविशर्त्याधिकशततमो< ध्याय: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन भीमसेन उवाच ब्रह्मेशानेन्द्रवरुणानवहद् य: पुरा रथ: । तमास्थाय गतौ कृष्णौ न तयोर्विद्यते भयम्,भीमसेनने कहा--महाराज! जो रथ पहले ब्रह्मा, महादेव, इन्द्र और वरुणकी सवारीमें आ चुका है, उसीपर बैठकर श्रीकृष्ण और अर्जुन युद्धके लिये गये हैं। अतः उनके लिये तनिक भी भय नहीं है इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें भीमसेनका प्रवेश और भयंकर पराक्रमविषयक एक सौ सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ १२७ ॥। 2 (७ “ अनलो गौरिरिण्यं च दूर्वागोरोचनामृतम् । अक्षतं दधि चेत्यष्टौ मड़लानि प्रचक्षते ।। अग्नि, गौ, सुवर्ण, दूर्वा, गोरोचन, अमृत (घी), अक्षत और दही--इन आठ वस्तुओंको मांगलिक कहते हैं। अष्टाविशत्यधिकशततमोब< ध्याय: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धा ओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना संजय उवाच समुत्तीर्ण रथानीकं पाण्डवं विहसन् रणे । विवारयिषुराचार्य: शरवर्षरवाकिरत्
bhīmasena uvāca |
brahmeśānendravaruṇānavahad yaḥ purā rathaḥ |
tam āsthāya gatau kṛṣṇau na tayor vidyate bhayam ||
ພີມເສນາກ່າວວ່າ: «ຂ້າແຕ່ພະມະຫາກະສັດ, ລົດສົງຄາມທີ່ເຄີຍຮັບໃຊ້ພຣະພຣະຫມາ, ພຣະອີສານ (ພຣະສິວະ), ພຣະອິນທຣາ, ແລະ ພຣະວະຣຸນ—ກຣິສນະ ແລະ ອາຣຊຸນ ໄດ້ຂຶ້ນລົດນັ້ນແລ້ວອອກໄປສູ່ສົງຄາມ. ດັ່ງນັ້ນ ສໍາລັບທັງສອງ ບໍ່ມີຄວາມຢ້ານກົວແມ່ນແຕ່ນ້ອຍ.»
भीमसेन उवाच
Fearlessness is presented as a natural consequence of righteous purpose and trustworthy support: when one’s action is aligned with dharma and backed by proven strength (here symbolized by the divine-associated chariot and the Kṛṣṇa–Arjuna partnership), anxiety should not dominate the mind.
Bhīma reassures the king (contextually, Yudhiṣṭhira) that Kṛṣṇa and Arjuna have gone to battle on a chariot famed for having carried major deities; hence, they are not to be feared for or doubted—implying their mission will proceed with confidence and protection.