द्रोणपर्व (अध्याय १) — भीष्मनिधनानन्तरं धृतराष्ट्रस्य शोकः, सेनायाः स्थितिः, कर्णस्मरणं च
Droṇa Parva, Chapter 1: Dhṛtarāṣṭra’s grief after Bhīṣma’s fall and the army’s reorientation toward Karṇa
वैशम्पायन उवाच तथा तु संजयं कर्ण कीर्तयन्तं पुन: पुनः । आशीविषवदुच्छवस्य धृतराष्ट्रोडब्रवीदिदम्,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! जब संजय इस प्रकार बार-बार कर्णका नाम ले रहा था, उस समय राजा धूृतराष्ट्रने विषधर सर्पके समान उच्छवास लेकर इस प्रकार कहा
ໄວສັມປາຍະນະ ກ່າວວ່າ: ໂອ ຈະນະເມຊະຍະ, ເມື່ອສັນຊະຍະກ່າວຍ້ອງຍໍ ແລະເອີ້ນນາມ ກັນນະ ຊ້ຳໆ, ພະຣາຊາ ທຣິຕະຣາສະຕຣະ ໄດ້ຫາຍໃຈພົ່ນອອກດັ່ງງູພິດ ແລະກ່າວດັ່ງນີ້.
वैशम्पायन उवाच