भीष्मपर्व — अध्याय ६२: वासुदेवमहात्म्यप्रशंसा (देव–ब्रह्मसंवादः)
यदि नाहं परित्याज्यो युवा भ्यामिह संयुगे । विक्रमेणानुरूपेण युध्येतां पुरुषर्षभी,“यदि युद्धमें आप दोनोंको मेरा परित्याग करना उचित नहीं जान पड़ता हो तो द्रोणाचा्य और आप दोनों श्रेष्ठ पुरुष अपने योग्य पराक्रम प्रकट करते हुए युद्ध कीजिये'
sañjaya uvāca |
yadi nāhaṃ parityājyo yuvābhyām iha saṃyuge |
vikrameṇānurūpeṇa yudhyetāṃ puruṣarṣabhī ||
ສັນຊະຍະ ກ່າວວ່າ: «ຖ້າໃນສົງຄາມນີ້ ພວກເຈົ້າສອງຄົນບໍ່ເຫັນວ່າຄວນປະຖິ້ມຂ້າພະເຈົ້າ ກໍ່ຂໍໃຫ້ ດໂຣນາຈານ ແລະ ພວກເຈົ້າສອງຄົນ—ຜູ້ກ້າແຫ່ງມະນຸດ—ຈົ່ງຮົບຕໍ່ໄປ ໂດຍສະແດງຄວາມກ້າຫານໃຫ້ສົມກັບກໍາລັງຂອງຕົນ».
संजय उवाच