उत्पातवर्णनम् (Utpāta-varṇanam) — Catalogue of Portents
वक्रानुवक्रं कृत्वा च श्रवण पावकप्रभ: । ब्रह्मराशिं समावृत्य लोहिताजड़ी व्यवस्थित:,अग्निके समान कान्तिमान् मंगल ग्रह (जिसकी स्थिति मघा नक्षत्रमें बतायी गयी है) बारंबार वक्र होकर ब्रह्मराशि (बृहस्पतिसे युक्त नक्षत्र) श्रवणको पूर्णरूपसे आवृत करके स्थित है
ວຽສະກ່າວວ່າ: «ດາວອັງຄານ—ສະຫວ່າງດັ່ງໄຟ—ເຄື່ອນໄປດ້ວຍທາງຄົດຄ້ຽວຊ້ຳໆ. ມັນປົກຄຸມນັກສັດຣາ ສຣະວະນະ (Śravaṇa) ຢ່າງສິ້ນເຊີງ ພາຍໃນ ‘ພຣະຫມະຣາຊີ’ ແລະຢືນຢູ່ທີ່ນັ້ນ ດ້ວຍສີແດງດັ່ງເລືອດ»។
व्यास उवाच