कर्मयोग–ज्ञानयज्ञ–अवतारोपदेश
Karma-Yoga, Jñāna-Yajña, and Avatāra Instruction
सम्बन्ध-- भगवान्ने कर्मयोगके आचरणद्वारय अनामय पदकी प्राप्ति बतलायी, इसपर अर्जुनको यह जिज्ञासा हो सकती है कि अनामय परम पदकी प्राप्ति मुझे कब और कैसे होगी; इसके लिये भगवान् दो शलोकोंमें कहते हैं-- यदा ते मोहकलिल बुद्धिव्य॑तितरिष्यति | तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च,जिस कालमें तेरी बुद्धि मोहरूप दलदलको भलीभाँति पार कर जायगी, उस समय तू सुने हुए और सुननेमें आनेवाले इस लोक और परलोकसम्बन्धी सभी भोगोंसे वैराग्यको प्राप्त हो जायगाः
yadā te mohakalilaṁ buddhir vyatitariṣyati | tadā gantāsi nirvedaṁ śrotavyasya śrutasya ca ||
ສັນຊະຍະໄດ້ກ່າວວ່າ: ເມື່ອປັນຍາຂອງເຈົ້າໄດ້ຂ້າມພົ້ນຈາກຫຼຸມຕົມແຫ່ງຄວາມຫຼົງຢ່າງສົມບູນ ໃນເວລານັ້ນເຈົ້າຈະເຖິງຄວາມເບື່ອໜ່າຍບໍ່ຍຶດຕິດຕໍ່ທັງສິ່ງທີ່ໄດ້ຍິນແລ້ວ ແລະສິ່ງທີ່ຍັງຈະໄດ້ຍິນ—ຕໍ່ຄຳສັນຍາແຫ່ງຄວາມເພີດເພີນທັງໃນໂລກນີ້ແລະໂລກໜ້າ.
संजय उवाच