भीष्म-पर्व अध्याय १०० — त्रिगर्त-आक्रमण, भीष्म-केन्द्रित पुनर्संयोजन, तथा शक्त्यस्त्र-विनिमय
आगमिष्ये ततः: क्षिप्रं त्वत्सकाशमरिंदम । अफक्रान्ते ततो भीष्मे प्रहरिष्यसि संयुगे,राजन! दुःशासनसे ऐसा कहकर जनेश्वर दुर्योधनने कर्णसे कहा--'शत्रुदमन! मैं मनुष्योंमें श्रेष्ठ भीष्मको युद्धसे हटनेके लिये राजी करके अभी तुम्हारे पास लौट आता हूँ। फिर भीष्मके हट जानेपर तुम युद्धके मैदानमें शत्रुओंपर प्रहार करना”
āgamiṣye tataḥ kṣipraṃ tvat-sakāśam ariṃdama | apakrānte tato bhīṣme prahariṣyasi saṃyuge rājān ||
ທຸຣະໂຢທະນະ ກ່າວຕໍ່ກັນນະວ່າ: «ໂອ ຜູ້ປາບສັດຕູ! ຂ້າພະອົງຈະກັບມາຫາເຈົ້າໃນບໍ່ຊ້າ ຫຼັງຈາກເກົ້າກ່ອມໃຫ້ ພີສະມະ—ຜູ້ປະເສີດສຸດໃນມະນຸດ—ຖອນອອກຈາກສົງຄາມ. ແລ້ວເມື່ອພີສະມະຖອນອອກແລ້ວ ເຈົ້າຈະຟາດຟັນສັດຕູໃນສະໜາມຮົບ, ໂອ ພະຣາຊາ!»
कर्ण उवाच