Devaśarmā–Vipula Dialogue on Ahorātra–Ṛtu as Moral Witnesses (अनुशासन पर्व, अध्याय ४३)
मायावी हि सुरेन्द्रोडसावहो प्राप्तोडस्मि संशयम् । “दूसरी युवतियोंकी तरह इस गुरुपत्नीकी भी मनुष्योंद्वारा रक्षा नहीं की जा सकती; क्योंकि देवराज इन्द्र बड़े मायावी हैं। अहो! मैं बड़ी संशयजनित अवस्थामें पड़ गया ।।
ພຣະອິນທຣາ ຈອມເທວະ ມີມາຍາຫຼາຍ—ຂ້າພະເຈົ້າຍັງບໍ່ອາດລະຄວາມສົງໄສໄດ້. «ເຫມືອນຍິງສາວອື່ນໆ ພັນລະຍາຂອງຄູອາຈານນີ້ ມະນຸດບໍ່ອາດປົກປ້ອງໄດ້ ເພາະພຣະອິນທຣາມີມາຍາໃຫຍ່. ໂອ! ຂ້າພະເຈົ້າຕົກຢູ່ໃນພາວະສົງໄສຢ່າງໜັກ… ບໍ່! ຄຳສັ່ງຂອງຄູອາຈານໃນທີ່ນີ້ ຈຳເປັນຕ້ອງປະຕິບັດແນ່ນອນ»
भीष्म उवाच