बुद्धियोगबलोत्साहै: सर्वास्त्रिषु च निष्ठित: । अस्त्रे गुर्वनुरागे च विशिष्टो5भवदर्जुन:,बुद्धि, मनकी एकाग्रता, बल और उत्साहके कारण वे सम्पूर्ण अस्त्र-विद्याओंमें प्रवीण हुए। अस्त्रोंके अभ्यास तथा गुरुके प्रति अनुरागमें भी अर्जुनका स्थान सबसे ऊँचा था
ດ້ວຍປັນຍາ ການຕັ້ງຈິດໝັ້ນ ກຳລັງ ແລະຄວາມຮຸ່ນແຮງໃນໃຈ ອາຣຊຸນ ໄດ້ຊຳນານໃນວິຊາອາວຸດທຸກປະການ. ໃນການຝຶກອາວຸດ ແລະໃນຄວາມຈົ່ງຮັກພັກດີຕໍ່ຄູອາຈານ ອາຣຊຸນກໍໂດດເດັ່ນກວ່າຜູ້ອື່ນ.
वैशम्पायन उवाच