यक्षने पूछा--मनुष्यकी आत्मा क्या है? इसका दैवकृत सखा कौन है? इसका उपजीवन (जीवनका सहारा) क्या है? और इसका परम आश्रय क्या है? ।। युधिछिर उवाच पुत्र आत्मा मनुष्यस्य भार्या दैवकृतः सखा | उपजीवनं च पर्जन्यो दानमस्य परायणम्,युधिष्ठिर बोले--पुत्र मनुष्यकी आत्मा है, स्त्री इसकी दैवकृत सहचरी है, मेघ उपजीवन है और दान इसका परम आश्रय है
yudhiṣṭhira uvāca | putra ātmā manuṣyasya bhāryā daivakṛtaḥ sakhā | upajīvanaṃ ca parjanyo dānam asya parāyaṇam ||
ಯುಧಿಷ್ಠಿರನು ಹೇಳಿದನು—ಪುತ್ರನೇ ಮನುಷ್ಯನ ಆತ್ಮ; ಪತ್ನಿ ದೈವಕೃತ ಸಖಿ. ಪರ್ಜನ್ಯ (ಮಳೆ ತರುವ ಮೇಘಗಳು) ಅವನ ಉಪಜೀವನ; ದಾನವೇ ಅವನ ಪರಮ ಆಶ್ರಯ.
युधिछिर उवाच