अम्बा–राम–भीष्म संवादः
Amba–Rama–Bhishma Dialogue on Vow and Refuge
दीप्तात्मानमहं तं च हनिष्यामीति भार्गव । “महामुने राम! प्रभो! ऐसा होनेसे आपकी कही हुई बात सत्य सिद्ध होगी। वीरवर भार्गव! आपने समस्त क्षत्रियोंको जीतकर ब्राह्मणोंके बीचमें यह प्रतिज्ञा की थी कि यदि कोई ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य अथवा शाद्र ब्राह्मणोंसे द्वेष करेगा तो मैं उसे निश्चय ही मार डालूँगा। साथ ही भयभीत होकर शरणमें आये हुए शरणार्थियोंका परित्याग मैं जीते-जी किसी प्रकार नहीं कर सकूँगा और जो युद्धमें एकत्र हुए सम्पूर्ण क्षत्रियोंको जीत लेगा, उस तेजस्वी पुरुषका भी मैं वध कर डालूँगा || ११--१४ ह |। स एवं विजयी राम भीष्म: कुरुकुलोदवह: । तेन युध्यस्व संग्रामे समेत्य भूगुनन्दन,'भृगुनन्दन राम! इस प्रकार कुरुकुलका भार वहन करनेवाला भीष्म समस्त क्षत्रियोंपर विजय पा चुका है; अतः आप संग्राममें उसके सामने जाकर युद्ध कीजिये”
dīptātmānam ahaṃ taṃ ca haniṣyāmīti bhārgava |
ಭೀಷ್ಮನು ಹೇಳಿದನು—“ಓ ಭಾರ್ಗವ! ಆ ದೀಪ್ತಾತ್ಮನನ್ನೂ ನಾನು ಸಂಹರಿಸುವೆನು।” ಹೀಗೆ ಕುರುಕುಲದ ಧುರೀಣ ಭೀಷ್ಮನು ಎಲ್ಲಾ ಕ್ಷತ್ರಿಯರ ಮೇಲೆ ವಿಜಯ ಸಾಧಿಸಿದ್ದಾನೆ; ಆದ್ದರಿಂದ, ಓ ಭೃಗುನುಂದನ ರಾಮ, ಸಮರದಲ್ಲಿ ಅವನ ಎದುರಿಗೆ ಬಂದು ಯುದ್ಧಮಾಡು.
भीष्म उवाच