द्रोण–सात्यकि-युद्धम्
Droṇa–Sātyaki Engagement
गाहमानमनीकानि मातड़्मिव यूथपम् | महेष्वासं पराक्रान्तं नरव्याप्रमवारयन्,अर्जुन पुत्रशोकसे संतप्त एवं कुपित हुए प्राणान्तक मृत्युके समान प्रतीत होते थे। वे उस भयंकर युद्धमें अपने प्राणोंको निछावर करनेके लिये उद्यत, कवच आदिसे सुसज्जित और विचित्र रीतिसे युद्ध करनेवाले थे। जैसे यूथयति गजराज गजसमूहमें प्रवेश करता है, उसी प्रकार आपकी सेनाओंमें घुसते हुए महाधनुर्धर परम पराक्रमी उन नरश्रेष्ठ अर्जुनको पूर्वोक्त योद्धाओंने आकर रोका
gāhamānam anīkāni mātangam iva yūthapam | maheṣvāsaṁ parākrāntaṁ naravyāghram avārayan ||
ಸೈನ್ಯವ್ಯೂಹಗಳೊಳಗೆ ನುಗ್ಗುತ್ತಿದ್ದ—ಗುಂಪಿನೊಳಗೆ ಪ್ರವೇಶಿಸುವ ಗಜರಾಜನಂತೆ—ಆ ಮಹೇಷ್ವಾಸನಾದ, ಪರಾಕ್ರಮಿಯಾದ ನರవ్యಾಘ್ರನನ್ನು ಅವರು ಬಂದು ತಡೆದರು.
संजय उवाच