Virāṭa’s Conciliation and Uttara’s Account of the Unseen Champion
Bṛhannadā/Arjuna
नेदं मनुष्या: संदध्युर्न हीदं तेषु विद्यते । पौराणानां महास्त्राणां विचित्रो5यं समागम:,“दूसरे मनुष्य इस दिव्यास्त्रका संधान नहीं कर सकते; क्योंकि यह अस्त्र दूसरे मनुष्योंके पास है ही नहीं। यहाँ प्राचीनकालके बड़े-बड़े अस्त्रोंका यह अद्भुत समागम हुआ है
«មនុស្សដទៃមិនអាចភ្ជាប់ និងប្រើអាវុធទេវៈនេះបានទេ ព្រោះអាវុធនេះមិនមាននៅក្នុងដៃពួកគេឡើយ។ នៅទីនេះ បានកើតមានការប្រមូលផ្តុំដ៏ចម្លែក និងអស្ចារ្យនៃអាវុធធំៗបុរាណ»។
वैशम्पायन उवाच