Adhyāya 195 — Arjuna’s Capability and Restraint Regarding Divyāstras
Udyoga Parva
उनके पीछे सुचित्तके पुत्र रणदुर्मद सत्यधृति, श्रेणिमान्, वसुदान तथा काशिराजके सामर्थ्यशाली पुत्र जा रहे थे। इन सबका अनुगमन करनेवाले बीस हजार रथी, घुँघुरुओंसे सुशोभित दस करोड़ घोड़े, ईषादण्डके समान दाँतवाले, प्रहारकुशल, अच्छी जातिमें उत्पन्न, मदस्रावी और मेघोंकी घटाके समान चलनेवाले बीस हजार हाथी थे ।। षष्टि्नागसहस्राणि दशान्यानि च भारत | युधिष्ठटिरस्य यान्यासन् युधि सेना महात्मन:,भारत! इनके सिवा, युद्धमें महात्मा युधिष्ठिरके पास निजी तौरपर सत्तर हजार हाथी और थे, जो जल बरसानेवाले बादलोंकी भाँति अपने गण्डस्थलसे मदकी धारा बहाते थे। वे सब-के-सब जंगम पर्वतोंकी भाँति राजा युधिष्ठिरका अनुसरण कर रहे थे
ṣaṣṭir nāga-sahasrāṇi daśānyāni ca bhārata | yudhiṣṭhirasya yānīyāsan yudhi senā mahātmanaḥ ||
វៃសម្បាយនៈបាននិយាយថា៖ ឱ ភារតៈ! ក្រៅពីកងទ័ពដែលបានពណ៌នាមកហើយ ព្រះយុធិષ્ઠិរ មហាត្មា បានរៀបចំកងសម្រាប់សមរភូមិរបស់ព្រះអង្គផ្ទាល់ មានដំរីចំនួនហុកសិបពាន់ ហើយបន្ថែមទៀតដប់ពាន់។ ក្នុងសង្គ្រាម ពួកវាបានដើរតាមព្រះអង្គ—ដំរីពូជល្អ ជំនាញក្នុងការវាយប្រហារ ក្បាលកណ្ដាលហូរទឹកមាត់រដូវមាត់ដូចពពកនាំភ្លៀង ហើយរុញទៅមុខដូចភ្នំមានជីវិត ដើរតាមស្តេចដោយស្ថេរភាព។
वैशम्पायन उवाच