Śānti Parva, Adhyāya 52 — Bhīṣma’s Humility Before Kṛṣṇa and the Granting of Boons
कथं त्वयि स्थिते कृष्णे शाश्वते लोककर्तरि । प्रत्रूयान्मद्विध: कश्चिद् गुरौ शिष्य इव स्थिते,“श्रीकृष्ण! आप जगत्के कर्ता और सनातन पुरुष हैं। आपके रहते हुए मेरे-जैसा कोई भी मनुष्य कैसे उपदेश कर सकता है? क्या गुरुके रहते हुए शिष्य उपदेश देनेका अधिकारी है?”
«តើអាចធ្វើដូចម្តេចបាន ខណៈដែលព្រះក្រឹស្ណ—អង្គអចិន្ត្រៃយ៍ ជាអ្នកបង្កើតលោក—ស្ថិតនៅទីនេះ? មនុស្សដូចខ្ញុំអាចហ៊ានបង្រៀនបានដូចម្តេច? តើសិស្សអាចមានសិទ្ធិបង្រៀន នៅពេលគ្រូនៅមុខដែរឬ?»
वैशम्पायन उवाच