शल्मलि–पवनसंवादः
The Dialogue of Śalmali and Pavana
ततो<पश्यत् सुविस्तीर्ण हद्यं पद्माभिभूषितम् । नानापक्षिगणाकीर्ण सर: शीतजलं शिवम्,आगे जाकर उसने एक विस्तृत एवं मनोरम सरोवर देखा जो कमल-समूहोंसे सुशोभित हो रहा था। नाना प्रकारके जलपक्षी उसमें कलरव कर रहे थे। वह तालाब शीतलजलसे भरा था और अत्यन्त सुखद जान पड़ता था
បន្ទាប់មក គាត់បានឃើញស្រះទឹកធំទូលាយយ៉ាងវិសាល ស្រស់ស្អាត តុបតែងដោយផ្កាឈូក។ មានហ្វូងបក្សីជាច្រើនប្រភេទកកកុញនៅទីនោះ ហើយស្រះនោះមានទឹកត្រជាក់ បរិសុទ្ធ និងជាទីរីករាយ។
भीष्म उवाच