Sārasvata–Dadhīca Upākhyāna at Sarasvatī Tīrtha
Balarāma’s Pilgrimage Context
उत्पपाताश्रमात् तस्मादन्तरिक्षं विशाम्पते । जिज्ञासार्थ तदा भिक्षोर्जैगीषव्यस्य देवल:,प्रजानाथ! ऐसा विचार करते हुए वे मन्त्रशास्त्रके पारंगत विद्वान् मुनि उस आश्रमसे आकाशकी ओर उड़ चले। उस समय भिक्षु जैगीषव्यकी परीक्षा लेनेके लिये उन्होंने ऐसा किया
គាត់បានលោតឡើងពីអាស្រមនោះ ទៅកាន់អន្តរិក្ស ឱ ម្ចាស់ប្រជាជន។ នៅពេលនោះ ដេវលៈ បានធ្វើដូច្នេះ ដើម្បីស្វែងយល់ និងសាកល្បងភិក្ខុជៃគីសវ្យៈ។
वैशम्पायन उवाच