Kārttikeya-Abhiṣecana: Mātṛgaṇa-Nāma Saṃkīrtana and Skanda’s Commission
ऐरावत: सानुचर: कला: काष्ठास्तथैव च । मासार्धमासा ऋतवस्तथा रात्रयहनी नूप,रुद्रर्वसुभिरादित्यैरश्विभ्यां च वृतः प्रभु: । महापराक्रमी इन्द्र और विष्णु, सूर्य और चन्द्रमा, धाता और विधाता, वायु और अग्नि, पूषा, भग, अर्यमा, अंश, विवस्वान्ू, मित्र और वरुणके साथ बुद्धिमान् रुद्रदेव, एकादश रुद्रणण, आठ वसु, बारह आदित्य और दोनों अश्विनीकुमार--ये सब-के-सब प्रभावशाली कुमार कार्तिकेयको घेरकर खड़े हुए प्रजानाथ! ब्रह्माजी, पुलस्त्य, महातपस्वी पुलह, अंगिरा, कश्यप, अत्रि, मरीचि, भृगु, क्रतु, हर, वरुण, मनु, दक्ष, ऋतु, ग्रह, नक्षत्र, मूर्तिमती सरिताएँ, मूर्तिमान् सनातन वेद, समुद्र, सरोवर, नाना प्रकारके तीर्थ, पृथिवी, झ्ुलोक, दिशा, वृक्ष, देवमाता अदिति, ही, श्री, स्वाहा, सरस्वती, उमा, शची, सिनीवाली, अनुमति, कुहू, राका, धिषणा, देवताओंकी अन्यान्य पत्नियाँ, हिमवान्, विन्ध्य, अनेक शिखरोंसे सुशोभित मेरुगिरि, अनुचरोंसहित ऐरावत, कला, काष्ठा, मास, पक्ष, ऋतु, रात्रि, दिन, अअश्रोंमें श्रेष्ठ उच्चै:श्रवा, नागराज वासुकि, अरुण, गरुड़, ओषधियोंसहित वृक्ष, भगवान् धर्मदेव, काल, यम, मृत्यु तथा यमके अनुचर--ये सब-के-सब वहाँ एक साथ पधारे थे
vaiśampāyana uvāca |
airāvataḥ sānucaraḥ kalāḥ kāṣṭhās tathaiva ca |
māsārdhamāsā ṛtavas tathā rātryahanī nṛpa ||
វៃសម្បាយនៈបានពោលថា៖ «ឱ ព្រះមហាក្សត្រ! អៃរាវត មកដល់ទីនោះជាមួយអ្នកបម្រើរបស់គាត់; ហើយមាត្រដ្ឋានទេវៈនៃកាលៈ—កលា និងកាស្ឋា—ព្រមទាំងខែ ទ្វីបខែ (ពាក់កណ្ដាលខែ) រដូវ និងយប់-ថ្ងៃ ក៏បានមកដែរ។ ដូច្នេះ សូម្បីតែលំដាប់នៃពេលវេលា និងការគ្រប់គ្រងកោស्मिक ក៏ត្រូវបានពណ៌នាថាមកចូលរួម បញ្ជាក់ថាព្រឹត្តិការណ៍នេះមានន័យសកល និងថែរក្សាពិភពលោក មិនមែនជារឿងផ្ទាល់ខ្លួន ឬតំបន់តូចៗទេ។»
वैशम्पायन उवाच