अध्याय ९ — दुर्योधनस्य अन्त्यावस्था, विलापः, तथा सौप्तिक-प्रतिवृत्तम्
Duryodhana’s Final Condition, Lamentation, and the Night’s Report
तथैव ते परिष्वक्ता: परिष्वज्य च ते नृपम् । पुनः पुन: प्रेक्षमाणा: स्वकानारुरुहू रथान्,मरनेसे पहले दुर्योधनने तीनों वीरोंको गले लगाया और उन तीनोंने भी राजाको हृदयसे लगाकर विदा दी, फिर वे बारंबार उसकी ओर देखते हुए अपने-अपने रथोंपर सवार हो गये
tathaiva te pariṣvaktāḥ pariṣvajya ca te nṛpam | punaḥ punaḥ prekṣamāṇāḥ svakān āruruhū rathān ||
សញ្ជ័យបាននិយាយថា៖ «ដូចគ្នានោះ ពួកគេក៏បានឱបគាត់ដែរ; ហើយក្រោយពីបានឱបព្រះមហាក្សត្រ ពួកគេបានលាលែងចេញទៅ។ ពួកគេបែរមកមើលគាត់ម្តងហើយម្តងទៀត ខណៈពេលឡើងជិះរថសង្គ្រាមរបស់ខ្លួនៗ»។
संजय उवाच