Nāradasya Rājadharma-praśnāḥ
Nārada’s Examination of Royal Ethics
विदुस्ते वीर कर्माणि नानवाप्तानि कानिचित् । कृषि आदिके कार्य विश्वसनीय, लोभरहित और बड़े-बूढ़ोंके समयसे चले आनेवाले कार्यकर्ताओंद्वारा ही कराते हो न? राजन्! वीरशिरोमणे! क्या तुम्हारे कार्योंके सिद्ध हो जानेपर या सिद्धिके निकट पहुँच जानेपर ही लोग जान पाते हैं? सिद्ध होनेसे पहले ही तुम्हारे किन्हीं कार्योको लोग जान तो नहीं लेते ।। ३३ डक कच्चित् कारणिका धर्मे सर्वशास्त्रेषु कोविदा: । कारयन्ति कुमारांश्न योधमुख्यांश्ष सर्वश:,तुम्हारे यहाँ जो शिक्षा देनेका काम करते हैं, वे धर्म एवं सम्पूर्ण शास्त्रोंके मर्मज्ञ विद्वान होकर ही राजकुमारों तथा मुख्य-मुख्य योद्धाओंको सब प्रकारकी आवश्यक शिक्षाएँ देते हैं न?
kaccit kāraṇikā dharme sarvaśāstreṣu kovidāḥ | kārayanti kumārāṃś ca yodhamukhyāṃś ca sarvaśaḥ ||
នារ៉ទៈបានមានព្រះវាចា៖ «ឱ ព្រះមហាក្សត្រ! តើព្រះអង្គបានធានាដែរឬទេថា អ្នកបង្រៀន និងមន្ត្រីដែលទទួលបន្ទុកបណ្តុះបណ្តាល គឺជាអ្នកឈរលើធម៌ និងជំនាញពេញលេញក្នុងសាស្ត្រទាំងអស់ ហើយពួកគេបង្រៀនវិន័យចាំបាច់គ្រប់ប្រភេទ—យ៉ាងពេញលេញ—ដល់ព្រះរាជកុមារ និងយោធាវីរបុរសជាន់ខ្ពស់?»
नारद उवाच