सम्प्रदत्तास्त्रशिक्षा वै पपानीकविनाशनी । सतां शिक्षामधिष्ठाय कुर्वन् परबलक्षयम्,तात! पूर्वकालमें परम बुद्धिमान् परशुरामजीने उन यशस्वी भीष्मको शत्रु-सेनाका विनाश करनेवाली जो अस्त्रशिक्षा प्रदान की थी, उसका आश्रय लेकर पाण्डवपक्षीय शत्रु- सेनाका संहार करते हुए कुरुकुलके वृद्ध पितामह एवं शत्रुवीरोंका नाश करनेवाले भीष्म नित्यप्रति दस हजार मुख्य योद्धाओंका वध करते आ रहे थे
sampradattāstraśikṣā vai pāṇḍavānīkavināśanī | satāṃ śikṣām adhiṣṭhāya kurvan parabalakṣayam, tāta |
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संजय उवाच