Puṣkara-Śapatha Itihāsa (Agastya–Indra Dispute at the Tīrthas) | पुष्कर-शपथ-आख्यानम्
श्रमेण महता कृत्वा ते बिसानि कलापश: । तीरे निक्षिप्य पद्मिन्यास्तर्पणं चक्रुरम्भसा,फिर बहुत परिश्रम करके उन्होंने अलग-अलग बोझे बाँधे। इसके बाद उन्हें किनारेपर ही रखकर वे सरोवरके जलसे तर्पण करने लगे
śrameṇa mahatā kṛtvā te bisāni kalāpaśaḥ | tīre nikṣipya padminyās tarpaṇaṃ cakrur ambhasā ||
ដោយការខិតខំយ៉ាងខ្លាំង ពួកគេបានប្រមូលដើមឈូកធ្វើជាបាច់ៗផ្សេងៗគ្នា។ ដាក់វាទុកលើច្រាំងស្រះដែលពេញដោយឈូក ហើយបន្ទាប់មក ពួកគេបានធ្វើតර්បណៈ (ការបូជាទឹក) ដោយយកទឹកស្រះនោះ។
शुन:सख उवाच