कुरुवंशप्रश्नः—दुःषन्तस्य राजधर्मवर्णनम्
Kuru Lineage Inquiry and the Portrait of King Duḥṣanta’s Rule
श्रावयेत महापुण्यं तस्य धर्म: सनातन: । कुरूणां प्रथितं वंशं कीर्तयन् सततं शुचि:,लोकमें जिनके महान् कर्म विख्यात हैं, जो सम्पूर्ण विद्याओंके ज्ञानद्वारा उद्धासित होते थे और जिनके धन एवं तेज महान् थे, ऐसे महामना पाण्डवों तथा अन्य क्षत्रियोंकी उज्ज्वल कीर्तिको लोकमें फैलानेवाले और पुण्यकर्मके इच्छुक श्रीकृष्णद्वैपायन वेदव्यासने इस पुण्यमय महाभारत ग्रन्थका निर्माण किया है। यह धन, यश, आयु, पुण्य तथा स्वर्गकी प्राप्ति करानेवाला है। जो मानव इस लोकमें पुण्यके लिये पवित्र ब्राह्मणोंको इस परम पुण्यमय ग्रन्थका श्रवण कराता है, उसे शाश्वत धर्मकी प्राप्ति होती है। जो सदा कौरवोंके इस विख्यात वंशका कीर्तन करता है, वह पवित्र हो जाता है
śrāvayet mahāpuṇyaṃ tasya dharmaḥ sanātanaḥ | kurūṇāṃ prathitaṃ vaṃśaṃ kīrtayan satataṃ śuciḥ ||
វៃសម្បាយនៈ បាននិយាយថា៖ អ្នកណាដែលធ្វើឲ្យ «មហាភារត» ដ៏មានបុណ្យអស្ចារ្យនេះ ត្រូវបានសូត្រ និងស្តាប់ នោះបានឈានដល់ធម៌អស់កល្បជានិច្ច។ ហើយអ្នកណាដែលប្រកាសរំលឹកជានិច្ចនូវវង្សកុលកុរុ/កោរវៈដ៏ល្បីល្បាញ នោះក៏ក្លាយជាបរិសុទ្ធ។
वैशम्पायन उवाच