आस्तीक-वरप्रदानम् (Āstīka’s Boon and the Interruption of the Sarpa-satra)
ऋत्विज ऊचु: अस्ति राजन् महत् सत्र त्वदर्थ देवनिर्मितम् । सर्पसत्रमिति ख्यातं पुराणे परिपठ्यते,ऋत्विजोंने कहा--राजन्! इसके लिये एक महान् यज्ञ है, जिसका देवताओंने आपके लिये पहलेसे ही निर्माण कर रखा है। उसका नाम है सर्पसत्र। पुराणोंमें उसका वर्णन आया है
ព្រះបូជាចារ្យទាំងឡាយបានពោលថា៖ «ព្រះរាជា! មានសត្រយញ្ញដ៏មហិមាមួយ ដែលទេវតាបានបង្កើតទុកសម្រាប់ព្រះអង្គជាមុន។ វាល្បីឈ្មោះថា “សರ್ಪសត្រ” ហើយត្រូវបានរៀបរាប់ក្នុងបុរាណកថាទាំងឡាយ»។
जनमेजय उवाच