पाण्डवानां पाञ्चालगमनम्
The Pāṇḍavas’ Journey toward Pāñcāla and News of the Svayaṃvara
हियसे त्वं बलाद भद्रे विश्वामित्रेण नन्दिनि । कि कर्तव्यं मया तत्र क्षमावान् ब्राह्म॒णो हाहम्,वसिष्ठजी बोले--भद्रे! तुम बार-बार क्रन्दन कर रही हो। मैं तुम्हारा आर्तनाद सुनता हूँ, परंतु क्या करूँ? कल्याणमयी नन्दिनि! विश्वामित्र तुम्हें बलपूर्वक हर ले जा रहे हैं। इसमें मैं क्या कर सकता हूँ। मैं एक क्षमाशील ब्राह्मण हूँ
hriyase tvaṃ balād bhadre viśvāmitreṇa nandini | kiṃ kartavyaṃ mayā tatra kṣamāvān brāhmaṇo hāham ||
វសិષ્ઠៈ បានមានព្រះវាចា៖ «ឱ នាងសុភាពរាបសារ នន្ទិនីដ៏ជាមង្គល! វិស្វាមិត្រ កំពុងអូសនាងទៅដោយកម្លាំង។ ខ្ញុំស្តាប់សូរស្រែកទុក្ខរបស់នាងម្តងហើយម្តងទៀត—តែខ្ញុំនឹងធ្វើអ្វីបានក្នុងរឿងនេះ? អាលាស! ខ្ញុំជាព្រាហ្មណ៍អ្នកអត់ធ្មត់»។
वसिष्ठ उवाच