और्वोपाख्यानम्
Aurva Episode: Restoration of Sight and Restraint of World-Destructive Anger
संध्या संरज्यते घोरा पूर्वरात्रागमेषु या । अशीतिभिललवैहींन तन्मुहुर्त प्रचक्षते,“रात्रि प्रारम्भ होनेके पहले जो पश्चिम दिशामें भयंकर संध्याकी लाली छा जाती है, उस समय अस्सी लवको छोड़कर सारा मुहूर्त इच्छानुसार विचरनेवाले यक्षों, गन्धर्वों तथा राक्षसोंके लिये निश्चित बताया जाता है। शेष दिनका सब समय मनुष्योंके कार्यवश विचरनेके लिये माना गया है
sandhyā saṃrajyate ghorā pūrvarātrāgameṣu yā | aśītibhir lavair hīnaṃ tanmuhūrtaṃ pracakṣate ||
វៃសម្បាយនៈបាននិយាយថា៖ «សន្ធ្យាដ៏គួរឱ្យភ័យរន្ធត់នោះ—នៅមុនយប់ចូលមក ពេលពណ៌ក្រហមដ៏គួរឱ្យខ្លាចរាលដាល—ជាសញ្ញានៃចន្លោះពេលមួយជាក់លាក់។ មហូរតានោះ ត្រូវបាននិយាយថា ស្មើមហូរតាពេញមួយ ដកចេញ៨០ លវៈ»។
वैशम्पायन उवाच