द्रौपद्याः सैरन्ध्रीवेषधारणं सुदेष्णासंवादश्च | Draupadī assumes the Sairandhrī guise and dialogues with Sudeshnā
तथा हि कामो भवतस्तथा कृतं महानसे त्वं भव मे पुरस्कृत: । नराश्ष ये तत्र समाहिता: पुरा भवांश्व तेषामधिपो मया कृत:,तथापि जैसी तुम्हारी रुचि है, मैंने वैसा किया है। तुम मेरी पाकशालामें अग्रणी होकर रहो। जो लोग वहाँ पहलेसे नियुक्त हैं, मैंने तुम्हें उन सबका स्वामी बनाया
「汝の望みのままに、我はそのように取り計らった。わが厨にあって先頭に立て。そこに以前より仕えていた者どもは、すべて汝の配下とし、汝をその長として任じた。」
विराट उवाच