स््नुषायां दुहितुर्वापि पुत्रे चात्मनि वा पुन: | अत्र शड़कां न पश्यामि तेन शुद्धिर्भविष्यति,पुत्रवधू और पुत्रीमें तथा पुत्र अथवा आत्मामें भेद नहीं है, अतः उसे पुत्रवधूके रूपमें ग्रहण करनेपर मुझे कलंककी शंका नहीं दिखायी देती और इससे हम दोनोंकी पवित्रता भी स्पष्ट हो जायगी
arjuna uvāca | snuṣāyāṃ duhitūr vāpi putre cātmani vā punaḥ | atra śaṅkāṃ na paśyāmi tena śuddhir bhaviṣyati ||
アルジュナは言った。「嫁であれ娘であれ、子であれ己であれ、親族としての名分と責務において真の隔てはありません。ゆえに、姫を嫁として迎えても不名誉の疑いは見当たらず、これによって我ら二人の清浄と正しさが明らかとなるでしょう。」
अजुन उवाच