शमीवृक्षस्थायुधप्रकाशनम् / Revelation and Identification of the Weapons on the Śamī Tree
त्रिगर्तान् मे पिता यातः शून्ये सम्प्रणिधाय माम् | सर्वा सेनामुपादाय न मे सन््तीह सैनिका:,“बृहन्नले! मेरे पिता सूने नगरमें उसकी रक्षाके लिये मुझे अकेला रखकर स्वयं सारी सेना साथ ले त्रिगर्तोंसे युद्ध करनेके लिये गये हैं। मेरे पास यहाँ कोई सैनिक नहीं है। मैं अकेला बालक हूँ और मैंने अस्त्रविद्यामें अभी अधिक परिश्रम भी नहीं किया है। ऐसी दशामें अस्त्र-शस्त्रोंके ज्ञाता और प्रौढ़ अवस्थावाले इन बहुसंख्यक कौरवोंका सामना मैं नहीं कर सकूँगा। अतः तुम रथ लेकर लौट चलो”
trigartān me pitā yātaḥ śūnye sampranidhāya mām | sarvāṃ senām upādāya na me santīha sainikāḥ ||
ヴァイシャンパーヤナは言った。「父はトリガルタ族と戦うために出陣し、全軍を引き連れて行った。私はこの空の都に、ただ一人の守りとして置かれた。ここには兵がいない。」この言葉は、都を守るべき務めと、援軍なきまま優勢な敵に抗することの現実的不可能との間にある緊張を示し、無謀な勇み足ではなく、賢明な助言と戦略的抑制の必要を浮かび上がらせる。
वैशम्पायन उवाच