Rathaghoṣa–Saṃjñāna: Damayantī’s Inference and the Dispatch of the Envoy (Āraṇyaka-parva, Adhyāya 71)
विदर्भान् यातुमिच्छामि दमयन्त्या: स्वयंवरम् । एकाह्ला हयतत्त्वज्ञ मन्यसे यदि बाहुक,“बाहुक! तुम अश्वविद्याके तत्त्वज्ञ हो, यदि मेरी बात मानो तो मैं दमयन्तीके स्वयंवरमें सम्मिलित होनेके लिये एक ही दिनमें विदर्भदेशकी राजधानीमें पहुँचना चाहता हूँ”
「われはダマヤンティーのスヴァヤンヴァラに臨むため、ヴィダルバへ赴きたい。バーフカよ、そなたは馬術の要を知る者。もし我が言に従うなら、一日のうちに都へ到着できると思うか。」
बृहृदश्च उवाच