नलस्य बाहुकत्वेन ऋतुपर्णनगरप्रवेशः
Nala as Bāhuka enters Ṛtuparṇa’s city
सा वनानि गिरींक्षैव सरांसि सरितस्तथा । पल्वलानि च सर्वाणि तथारण्यानि सर्वश:,“मेरे पति महामना नल युद्धकलामें कुशल और सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्रोंके विद्वान् हैं। मैं उन्हींकी खोज करती हुई वन, पर्वत, सरोवर, नदी, गड्ढे और सभी जंगलोंमें दुःखी होकर घूमती हूँ
彼女は森と山々を、また湖と川を、沼地を、そしてあらゆる荒野を、くまなくさまよい歩いた。
बृहृदश्च उवाच