Nala’s Embassy to Damayantī and the Gods’ Proposal (नलस्य दूतत्वं देवप्रस्तावश्च)
पुनर्ययतेन मां जित्वा वनवासं सुदारुणम् । प्रावत्राजयन् महारण्यमजिनै: परिवारितम्,“एक बार जूएके संकटसे बच जानेपर पुनः द्यूतका आयोजन करके उन्होंने मुझे जीत लिया और मृगचर्म पहनाकर वनवासका अत्यन्त दारुण कष्ट भोगनेके लिये इस महान् वनमें निर्वासित कर दिया
賽の戯れの災いを一度は免れたというのに、彼らは再び賭博を催し、またしても私を打ち負かした。しかも鹿皮をまとわせ、この大いなる森へと追い立て、苛烈きわまる林住の流罪を味わわせたのである。
वैशम्पायन उवाच