Arjuna Honored in Indra’s Court; Lomāśa’s Audience; Indra’s Disclosure of Lineage and Mission
Book 3, Chapter 45
यथार्चितो गृहीतास्त्रो विद्यया मन्नियोगत: । तथा त्वया विधाततयं स्त्रीषु संगविशारद:,/ !/ +कि ५ // 4 (४ गा 'जैसे अस्त्रविद्या सीख लेनेके पश्चात् अर्जुनको मेरी आज्ञासे तुमने संगीतविद्याद्वारा सम्मानित किया है, उसी प्रकार वे स्त्रीसंगविशारद हो सकें, ऐसा प्रयत्न करो”
「彼が武器を授かり武芸を修めたのち、我が命によりそなたが音楽の術をもって彼を遇したように、そのとおり、女たちとの交わりに通じたそなたが計らい、彼が女性との応対にも巧みとなるよう努めよ。」
वैशम्पायन उवाच