अध्याय ३३ — कर्म, दैव, हठ, स्वभाव और पुरुषार्थ पर द्रौपदी का उपदेश
Draupadī on Action, Fate, and Human Effort
प्रजापालनसम्भूतं फलं तव न गर्हितम् । एष ते विहितो राजन् धात्रा धर्म: सनातन:,“जब आप राज्य प्राप्त कर लेंगे, उस समय प्रजापालनरूप धर्मसे आपको जिस पुण्यफलकी प्राप्ति होगी, वह आपके लिये गर्हित नहीं होगा। महाराज! विधाताने आप- जैसे क्षत्रियका यही सनातनधर्म नियत किया है
そなたが王国を取り戻すとき、民を守り治めるというダルマから生じる功徳の果は、そなたにとって決して咎められるものではない。王よ、これこそが、造化の主がそなたのようなクシャトリヤに定めた永遠の法である。
वैशम्पायन उवाच