Draupadī’s Lament and Theodicy: Dharma, Dice, and Īśvara’s Governance (Āraṇyaka-parva 31)
यस्य प्रसादात् तद्धक्तो मर्त्यों गच्छत्यमर्त्यताम् | उत्तमां देवतां कृष्णे मावमंस्था: कथंचन,कृष्णे! जिनके कृपाप्रसादसे उनके प्रति भक्तिभाव रखनेवाला मरणधर्मा मनुष्य अमरत्वको प्राप्त हो जाता है, उन परमदेव परमेश्वरकी तुमको किसी प्रकार अवहेलना नहीं करनी चाहिये
クリシュナよ、その御恩寵によって、彼にバクティを捧げる死すべき人も不死に至る。その最上の神格を、いかなる形であれ侮ってはならぬ。
युधिछिर उवाच