अध्याय ३० — क्रोधदोषाः क्षमाप्रशंसा च
Defects of Anger and the Praise of Forbearance
हेतुमात्रमिदं धातु: शरीर क्षेत्रसंज्ञितम् | येन कारयते कर्म शुभाशुभफलं विभु:,यह क्षेत्रसंज्षक शरीर ईश्वरका साधनमात्र है, जिसके द्वारा वे सर्वव्यापी परमेश्वर प्राणियोंसे स्वेच्छा-प्रारब्धरूप शुभाशुभ फल भुगतानेवाले कर्मोंका अनुष्ठान करवाते हैं
「この『場(クシェートラ)』と呼ばれる身体は、創造主のただの器にすぎぬ。それを通して遍在の至上者は衆生に業を行わせ、御意と熟した宿業に従って、吉凶の果を味わわせるのだ。」
युधिछिर उवाच