Sūrya-stava: Dhaumya’s Counsel and the Aṣṭaśata-nāma of Sūrya
त्वत्तेजसा कृतं॑ चक्र सुनाभं विश्वकर्मणा । देवारीणां मदो येन नाशित: शार्ज्र्धन्चना,ब्रद्मतोकसहित ऊपरके सातों लोकोंमें तथा अन्य सब लोकोंमें भी ऐसा कोई प्राणी नहीं दीखता जो आप भगवान् सूर्यसे बढ़कर हो। भगवन्! जगतमें और भी बहुत-से महान् शक्तिशाली प्राणी हैं; परंतु उनकी कान्ति और प्रभाव आपके समान नहीं हैं। सम्पूर्ण ज्योतिर्मय पदार्थ आपके ही अन्तर्गत हैं। आप ही समस्त ज्योतियोंके स्वामी हैं। सत्य, सत्त्व तथा समस्त सात्त्विक भाव आपमें ही प्रतिष्ठित हैं। 'शार्इ” नामक धनुष धारण करनेवाले भगवान् विष्णुने जिसके द्वारा दैत्योंका घमंड चूर्ण किया है उस सुदर्शन चक्रको विश्वकर्माने आपके ही तेजसे बनाया है
tvattējasā kṛtaṃ cakraṃ sunābhaṃ viśvakarmaṇā | devārīṇāṃ mado yena nāśitaḥ śārṅgadhanvanā ||
ユディシュティラは言った。「汝の光輝そのものによって、ヴィシュヴァカルマンは輪毂の整った円盤を鍛え上げた。そのスダルシャナにより、シャールンガ弓を執る主ヴィシュヌは、神々の敵の驕りを粉砕した。かくして汝の輝きは、宇宙の秩序を支え、傲慢を屈せしめる神聖な武具の背後にある秘められた源泉として立つ。」
युधिछिर उवाच