यक्षोपाख्यान-प्रवेशः
Entry into the Yakṣa-Lake Episode
नित्यशश्चार्जवं तस्मिन् स्थितिस्तस्यैव च ध्रुवा । संक्षेपतस्तपोवृद्धैः शीलवृद्धैश्न कथ्यते,तप और शीलमें बढ़े हुए वृद्ध पुरुष संक्षेपमें उसके विषयमें ऐसा कहते हैं कि राजकुमार सत्यवान्में सरलताका नित्य निवास है और उस सदगुणमें उसकी अविचल स्थिति है
ナーラダは言った。「彼には常に率直さが宿り、その徳における立脚は揺るぎない。要するに、苦行と品行において円熟した長老たちは、彼をこのように語るのである。」
नारद उवाच